शॉर्ट स्टोरी इन हिन्दी ।

    शॉर्ट स्टोरी इन हिन्दी ।

                   हैलो दोस्तो में आपका दोस्त प्रमोद ।
         दोस्तों आज आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जारहा हु जिससे आपको बोहोत कूछ सीखने को ओर समज ने को मिलेगा । 
            ओर अगर ऐसा कभी आपके साथ हो तो आपको उस समय क्या करना चाहिए और क्या न करना चाहिए इस कहाँनी से आपको समज आ जाएगा. 
           तो दोस्तो चलिए में आपको इस शॉर्ट कहानी पे लेचता हु . 
             तो एक गांव में मनु नामका एक लड़का रहता था जिसके परिवार में उसके मम्मी पापा ओर एक छोटा भाई था कुल मिलाकर मनु के घरमे चार लोग रहते थे 
मनु के पापा सरकारी नौकरी करते थे और मनु की मां हाउस वाइफ थी और मनु का भाई स्कूल में पढ़ाई करता था अब मनु की बात करे तो मनु एक हुनहार ओर होशियार लड़का था जो हर बात और जरचीज में आगे था . 
          दोस्तों ये तो परिचय था मनु का अब आगे एक ओर भी परिचय बाकी है जो इस शॉर्ट स्टोरी का अहम किरदार है तो पहले में आपको उसका परिचय करवा ताहु.
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         उसका नाम है कनु जिहा कनु एक लोफर टाइप का लड़कथा ओर जो कभी पढ़ाई और संस्कारों के मामलों में बोहोत ही पीछे था कनु कभी परिवार मनु की तरह ही चार लोगों का ही था और कनु के पापा एक मजदुर थे और कनु की माँ घर पेही काम करती थी कनु का भी स्कूल में पढ़ाई करता था .
                दोस्तो कनु हमेशा ही असामाजिक गति विधियो में लगारह ता था जैसेकि चाल बाजिया ओर लोगो को ठगने का काम ही आता था उसको ।
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          दोस्तों ये तो थी अपनी शॉर्ट स्टोरी के दोनों किरदारों के परिचय अब हैम अपनी स्टोरी पे आते है 
दोस्तों ये कहानी कुछ 2004 की है जब मनु दसवीं कक्षा में पढ़ ता था और इस के दौरान एक शादी के फँसन में कनु ओर मनु दोनों की मुलाकात हुई थी और दोनों कुछ ही दिनों में अछे दोस्त बन गए लेकिन कहा जाता हैं न के अगर दोस्त अच्छा मिले तो जिंदगी सवरजा ती है और ओर बुरा मिले तो जिंदगी का बुरा वक्त वही से सुरु हो जाता है। तो अपने मनु के साथ यही हुआ . 
              दोस्तो मनु और कनु की दोस्ती हुई थी उसवक्त मनु की दसवी की पढ़ाई चलरही थी लेकिन जैसे कि मैंने आगे कहाथा अब मनु का बुरा वक्त सुरू होचुका था और मनु ने कनु की बातो में आकर अपनी दसवी की पढ़ाई बीच मे ही छोड़ दी और परीक्षा भी नही दी और यह सिर्फ कनु के कहने भर से के पढ़ लिख कर क्या करलेगा वैसेभी तू कोई बड़ा आदमी नही बन जाएगा और फिर बाद में तुजे भी मजदूरी ही करना है तो क्यू ना अभी सही तू मजदूरी करले तो तू अभीसे पैसा कमाना सुरु करदे 
ओर हुआ भी ऐसा ही मनु ने कनु किहि बात मानी और छोडो दी पढाई।
          अब दोस्तो जैसाकि मेने सुरुआत में कहाथा की इस शॉर्ट कहानी से हमे कुछ सीखने को मिलेगा.
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          तो  1,   सिख हमे ये मिलती है कि हमे अपने दोस्तों को चुन ने में कभी भी जल्दबाजी नही करनी है और जब भी कोई दोस्ती के लिए अपना हाथ आगे बढाऐ तो वह इंसान के बारे मके पहले आपको थोड़ा बोहोत जान लेना चाहिए जो गलती मनु ने करी वह आपको नही करनी . 
                         अब कहानी आगे देखतेहैं तो दोस्तों अब मनु ने पढाई छोड़दी है और अपने परिवार की भी नही सुनी और छोटीसी नॉकरी करनी सुरुकर दी ओर नॉकरी भी वहां पर जानेलगा जहांपर कनु जाता था ओर 
कनु जहांपर काम करता था वहां पर कनु के ओर भी मनचले दोस्त थे जो कनु कि हूबहू कॉपी थे . 
ये लोग दिन में नॉकरी करते और रातको सभी उल्टे सीधे काम करते थे दोस्तो सुरुआत में तो मनु को ये सब गलत लगरहा था लेकिन कहते है ना कि अगर घोड़े को गधे के साथ बांधा जाए तो वोभी लात मारना सिख जाए गा । 
दोस्तो कनु को उस से कोई मतलब नही था कि मनु बिगड़ जाएगा कि बर्बाद हो जाता है कनु को तो सिर्फ और सिर्फ मनु के पैसों से मतलब था जो मनु उसपर लुटाता था . 
                  लेकिन दूसरी तरफ से मनु ये सोचकर जिरहा था कि कनु उसका सबसे अच्छा और बढ़िया दोस्त है.
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          तो दोस्तो इससे हमें  2,  री सिख ये मिलती है कि हमें चाहे दोस्त हो या कोईभी हो या कोई भी इंसान हो हमे उससे रिस्ता सोच समझ कर बनाना चाहिए हमे गोर करना चाहिए कि सामने वाला इंसान हमसे किस तरह की मतलब रखता है और वो हमारे लिए अगर कुछ करता है तो उसमें उसका कोई फायदा है कि वो सिर्फ हमारी मदद करना चाहता है यह सब हमे एकबार बारीकी से सोच लेना चाहिए दोस्तो फिर हमें कोई फैसला लेना चाहिए ताकि आगेचलकर हमे कोई परेशानी ना आए जैसे कि मनु को इस कहानई में हुई है ।               अब आते है आगे की कहानी पे फिर धीरे धीरे
मनु भी कुछ कनु की तरह ही होगया ओर हर वो काम 
कर ने लगा जो कनु करता था जिस से मनु की समाज और दुनिया से दूरी इतनी बढ़ गई के मनु की कोई भी इज्जत नही करता था दोस्तो मनु की लाइफ अब एक 
दलदल में फस गई थी जहा से वो अब कभी भी वापस
नही आसकता था और मनु के परिवार ने भी मनु से रिश्ता तोड़ दिया था ।
                  दोस्तो मनु अब गुनाहों की दिनुनिया में कुछ इसतरह घुस चुका था कि वो कभी वापस नही आ पाया 
ओर फिर एक दिन मनु की लाश मिली गटर से ओर कहा जाता है कि मनु को अपने ही दोस्त कनु नही मारा था . 
              तो दोस्तो हमे  3, ओर आखरी सिख ये मिलति है कि हम एक सभ्य समाज का हिसा है और हमे ऐसे ही काम करना  चाहिए कि हम समाज और समाज 
हम से जुड़े रहे वरना ये समाज और दुनिया आपको कही का नही छोड़ेगी . 
            आखिर में आप सब पढ़ने वाले दोस्तो को ये बाता ना चाहता हु के हमे जिंदगी भगवान ने सिर्फ इसलिए नही दी कि हम हमारी ही सोचे जैसेकि कनु सोचता था हमे सबका भला सोचना होगा तभी हमारा भी भला होगा और फिर सर्व कल्याण में ही अपना कल्याण है । 
                 दोस्तों आशा है कि आपको ये कहानि अछि लगिहोगी अगर अच्छी लगे तो लाइक ओर शेर जरूर करना । 
                     फिरमिलेंगे दोस्तो । 
               

               

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14 Comments

Sp prajapati said…
सही बात है
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